मोटापे से जुड़ी बीमारियों पर वैश्विक खर्च 1,200 अरब डॉलर पहुंचेगा

लंदन। दुनिया भर में मोटापे से जुड़ी बीमारियों पर होने वाला सालाना खर्च साल 2025 तक 1,200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, अगर तेजी से बिगड़ती स्थिति पर काबू नहीं पाया जाता है। विशेषज्ञों नए अनुमान से यह जानकारी मिली है। विश्व मोटापा संघ (डब्ल्यूओएफ) ने अपने अनुमान में कहा है कि कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक्स और मधुमेह जैसे रोग दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे हैं जिसका प्रमुख कारण मोटापा और धूम्रपान है। इन रोगों को गैर-संचारी रोग की श्रेणी में रखा गया है।

द गार्जियन में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि ये दोनों (मोटापा और धूम्रपान) आधुनिक दुनिया के सबसे बड़े हत्यारे हैं। इसमें बताया गया कि अमेरिका में इलाज का बिल महज 8 सालों में 325 अरब डॉलर से बढ़कर 2014 में 555 अरब डॉलर हो गया। ब्रिटेन में यह साल 2025 तक 19 अरब डॉलर सालाना से बढ़कर 31 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

द गार्जियन ने संघ की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि अगर मोटापे को रोकने के उपाय नहीं किए जाते हैं, तो अगले 8 सालों में अमेरिका में मोटापे से जुड़ी बीमारियों के इलाज पर कुल 4,200 अरब डॉलर खर्च किए जाएंगे, जबकि जर्मनी 390 अरब डॉलर, ब्राजील 251 अरब डॉलर और ब्रिटेन 237 अरब डॉलर खर्च करेगा।

इसमें कहा गया कि साल 2025 तक दुनिया में कुल 2.7 अरब वयस्क अधिक वजन वाले या मोटापे के शिकार होंगे और इनमें से ज्यादातर को इलाज की जरूरत होगी। इसका मतलब यह है कि दुनिया की एक तिहाई आबादी अधिक वजन या मोटापा का शिकार होगी। डब्ल्यूओएफ के अध्यक्ष इयान काटरसन ने कहा, मोटापे से होने वाले रोग जैसे मधुमेह या हृदय रोग के इलाज पर होनेवाला खर्च वास्तव में खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा, डब्ल्यूएएफ द्वारा की जा रही निरंतर निगरानी से यह पता चलता है कि पिछले 10 सालों में मोटापे का प्रसार नाटकीय रूप से बढ़ा है और अनुमान है कि 2025 तक 17.7 करोड़ वयस्क गंभीर रूप से मोटापे से ग्रस्त होंगे। यह स्पष्ट है कि अब सरकारों द्वारा अपनी अर्थव्यवस्थाओं पर से इस बोझ को कम करने के लिए कार्य करने की आवश्यकता है।