सिरदर्द की समस्या में शरीर में पानी की कमी न होने दें

हमारी बदलती लाइफस्टाइल की वजह से सिरदर्द खास तौर पर माइग्रेन की समस्या आम हो गई है। तनाव, पर्याप्त नींद न लेना, अधिक शोर, फोन पर ज्यादा देर बात करना, जरूरत से ज्यादा सोचना, थकावट, सिर में रक्तप्रवाह कम होना जैसे कई कारणों से सिरदर्द की समस्या लोगों में बढ़ती जा रही है। कई लोगों को हफ्ते में एक या दो बार माइग्रेन के दर्द की शिकायत भी रहती है।

मेडिटेशन
प्रतिदिन दो बार 10-20 मिनट ध्यान करने से शरीर व मन दोनों को आराम मिलता है। सिर में रक्तप्रवाह बढ़ता है। बढ़ा हुआ रक्तसंचार सिरदर्द की आशंका कम करता है। हस्तपादासन, सर्वांगासन व हलासन रक्तसंचार बढ़ाने में मददगार हैं।

प्राणायाम
शरीर में ऑक्सीजन की कमी भी सिरदर्द का कारण है। ऐसे में गहरी सांस लें। इससे राहत मिलेगी। नाड़ी शोधन, भ्रामरी और कपाल भाति भी कर सकते हैं।

डिहाइड्रेशन से बचें
शरीर में पानी की कमी से भी सिरदर्द होने लगता है। यही वजह है कि कई बार थोड़ी-थोड़ी देर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से भी सिर का दर्द ठीक हो जाता है।

स्ट्रेचिंग
कई बार मसल्स में खिंचाव से भी सिरदर्द होता है। एक ही स्थिति में लगातार व लंबे समय तक बैठे रहने से गर्दन की मसल्स में तनाव होता है। थोड़े-थोड़े अंतराल पर स्ट्रेचिंग करेंं।

माइग्रेन का दर्द इतना भंयकर होता है कि रोगी परेशान हो जाता है। इस रोग में पुराना घी, मूंग की दाल, जौ, परवल, सहजन की फली, बथुआ, करेला, बैंगन व फलों में आम, अंगूर, नारियल व अनार का प्रयोग लाभकारी होता है। दालचीनी चूर्ण का लेप माथे पर करने से भी फायदा होता है। इस रोग में भूखे पेट रहने, धूप में घूमने या ज्यादा देर तक टीवी देखने से बचें।

आयुर्वेदिक ग्रंथों में इस रोग को अर्धावभेदक नाम दिया गया है। ओस, ठंडी हवाएं, अधिक भोजन करना, समय पर भोजन न करना, ठंडे पेय पदार्थो का प्रयोग, पहला भोजन पचा न होने पर फिर से खाना, बासी भोजन करना, मल-मूत्र रोकना, अधिक व्यायाम करना, हार्मोस में परिवर्तन, नींद न पूरी होना और थकान आदि कारणों से माइग्रेन हो सकता है।