आधी धूप और आधी छांव

आधी धूप और आधी छांव

वैसे तो बीरबल और अकबर एक दूसरे के बहुत करीब थे लेकिन कभी-कभी उनमें बहस हो जाती थी और बीरबल को अकबर राजमहल से बाहर निकाल देते थे लेकिन कुछ दिनों बाद अकबर, बीरबल को ढूंढते थे और उन्हें वापस राज्य में ले आते थे.

एक दिन ऐसे ही अकबर बीरबल पर क्रोधित हुए और उन्होंने बीरबल को राजमहल से बाहर निकाल दिया.

अकबर ने सोचा कि बहुत दिन हो गए हैं लेकिन बीरबल का तो कोई पता ही नहीं है. उन्होंने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि जाकर बीरबल को ढूंढो.

सैनिकों के सभी जगह ढूंढने पर भी बीरबल नहीं मिले. उन्होंने अकबर को सारी बात बताई. यह सुनकर अकबर ने एक योजना बनाई. उन्होंने पूरे राज्य में घोषणा करने को कहा कि सभी लोगों को आधी धुप और आधी छांव में राजमहल आना होगा.

बादशाह का यह आदेश सुनकर सभी लोग अचंभित हो गए. अगले दिन कोई भी राजमहल की तरफ नहीं आया. अपने दरबार में बैठे हुए अकबर ने बाहर किसी की आवाज सुनी. वह आदमी कह रहा था जहांपनाह मैं आपके आदेश के अनुसार आधी धुप और आधी छांव में राजमहल आया हूं.

अकबर ने देखा कि एक आदमी खाट को अपने सर के ऊपर उठाकर खड़ा था. अकबर उसे देखकर सारा माजरा समझ गए. उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा – मुझे यह बताओ ऐसा करने के लिए तुम्हें किसने कहा?

उस व्यक्ति ने कहा है – ऐसा करने के लिए मुझे बीरबल जी ने कहा है. वह मेरे साथ में ही रहते हैं. उस आदमी को अकबर ने बहुत सारा इनाम दिया और बीरबल को मना कर अपने साथ वापस राजमहल ले आए.

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