अभागा व्यक्ति – अकबर बीरबल की कहानी

abhaga vyakti

सम्राट अकबर के दरबार में एक बहुत ही अभागा व्यक्ति था. लोगों का ऐसा मानना था कि अगर उसका मुंह सुबह-सुबह देखा जाए तो सारा दिन खराब हो जाता था इसलिए सभी लोग उससे डरते थे.

यह बात जब अकबर को पता चली तो उन्होंने सोचा ऐसा व्यक्ति भी हो सकता है!! और अपने सैनिकों को आदेश दिया की उस व्यक्ति को राजमहल में ले आओ. हम उसे देखना चाहते हैं.

उस व्यक्ति को राजमहल के कमरे में ठहराया गया. अगले दिन स्नान के बाद अकबर सीधे उसी कमरे में चले गए और उन्होंने उस आदमी का मुंह देखा. वहां से जब वह अपनी बेगम के महल में जा रहे थे एक सैनिक वहां आ गया उसने बताया कि बेगम साहिबा बेहोश हो गई हैं.

बादशाह सोचते हैं अरे यह क्या हो गया… उस आदमी को देखे हुए तो कुछ ही देर हुई हैं और यह दुर्घटना…. उसके बाद वे जैसे ही खाने के लिए बैठे अचानक उनके पेट में जोरों से दर्द होने लगा और वे कुछ भी ना खा सकें. सारा दिन दर्द के मारे चिल्लाते रहे.

अकबर ने सोचा – यह सब उस अभागे व्यक्ति के कारण हो रहा है. आज के बाद उस व्यक्ति के कारण किसी को भी दुख झेलना नहीं पड़ेगा. वे अपने सैनिकों को बुलाते हैं और आदेश देते हैं कि उस व्यक्ति को सूली पर चढ़ा दिया जाए.

यह समाचार सुनकर उसका अभागे व्यक्ति को बहुत दुख हुआ. तभी बीरबल उस व्यक्ति से मिलने आते हैं. बीरबल को देखते ही उसके मन में इस संकट से मुक्ति पाने की आशा जाग उठती हैं.

उसने बीरबल को सारी कहानी सुनाई. बीरबल ने उसे अभागे व्यक्ति को आश्वस्त किया कि मैं तुम्हारी मदद करूंगा.

बीरबल ने उस व्यक्ति को कान में कुछ बात कही. अगले दिन उसने अपनी आखिरी इच्छा के लिए सम्राट से मिलने की इच्छा जताई इसलिए उसे बादशाह के सामने लाया गया.

वह व्यक्ति बादशाह से कहता है – जहांपनाह, आखिर मुझे किस गुनाह की सजा मिल रही है?

बादशाह कहते हैं – हमने तुम्हारे भाग्य के बारे में सुना है और खुद से अनुभव भी किया है. तुम एक बहुत ही दुर्भाग्यशाली व्यक्ति हो. तुम्हारी वजह से किसी को भी दुख भुगतना ना पड़े इसलिए तुम्हें यह सजा दी जा रही है.

वह अभागा व्यक्ति कहता है – मुझे माफ कीजिए जहांपनाह, मेरा मुंह देखने पर केवल आपको भोजन नहीं मिला लेकिन आपका भाग्य देखिए कल मैंने सबसे पहले आपका मुंह देखा और आज मुझे सूली पर चढ़ना पड़ रहा है.

उस व्यक्ति की यह बात सुनकर बादशाह को अपनी गलती का एहसास होता है और वे उसे आजाद कर देते हैं.

बादशाह उस व्यक्ति से पूछते हैं – तुम्हें ऐसा कहने की सलाह किसने दी?

वह व्यक्ति कहता है – मुझे ऐसा कहने के लिए बीरबल ने कहा क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनके बादशाह से कोई गलत काम हो. यह सुनकर बादशाह को बीरबल पर बहुत गर्व महसूस होता है

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